जिंदगी जीने का तरीका : जो व्यक्ति दूसरों की खुशी के लिए जिए वही जिंदगी सार्थक जिंदगी कहलाती है। अपने शरीर और दिमाग को जितनी आवश्यकता हो उतना ही आराम दें। आवश्यकता से ज्यादा शरीर और दिमाग को आराम देने से ये आलसी हो जाते हैं जिससे समय की बर्बादी होती है। जब समय एक बार चला जाता है तो वह लौटकर नहीं आता।