पुरुषार्थ की परिभाषा - मनुष्य द्वारा निःस्वार्थ भाव से किया गया ऐसा कर्म जिससे किसी जीव को हानि ना हो , उसके दिल तथा दिमाग को ठेस ना पहुंचे तो इसे पुरुषार्थ कहते हैं।
भारतीय संस्कृति में कुल चार पुरुषार्थ हैं -
1. धर्म
2 . अर्थ
3 . काम
4 . मोक्ष
दोस्तों जब तक आप अपना कार्य करेंगे तभी तक लोग आपका इज्जत करेंगे। जिस दिन आप अपना कार्य करना बंद कर देंगे उस दिन से दुसरे तो दूर अपने भी आपका इज्जत करना बंद कर देंगे। इस लेख में यही बताया गया है की किसी व्यक्ति के लिए कार्य कितना जरुरी होता है और क्यों कर्म ही पूजा है ।
नमस्कार दोस्तों आज मैं आप लोगों को ऐसा रहस्य बताने जा रहा हूँ जिसको आप अमल में लाकर १००% गारंटी के साथ सफलता प्राप्त कर लेंगे। इस लेख को शुरू से अंत तक पढ़े और यह जाने की वो कौन सा ऐसा रहस्य है जो व्यक्ति को सफलता के शिखर पर पहुंचा देगी।
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